दर्द अपनेपन का, कहानी

दर्द अपनेपन का


पचास वर्षीय राजेश बाबू ने सुबह सुबह करवट ली और हमेशा की तरह अपनी पत्नी मीता को चाय बनाने को कहा और फिर रजाई ढक कर करवट ले ली। कुछ पल उन्होने इंतजार की पर कोई हलचल ना होने पर उन्होने दुबारा आवाज दी..


ऐसा कभी भी नही हुआ था इसलिए राजेश बाबू ने लाईट जलाई और मीता को हिलाया पर कोई हलचल ना होने पर ना जाने वो घबरा से गए। रजाई हटाई तो मीता निढाल सी एक ओर पडी थी. ना जाने रात ही रात मे क्या हो गया..

अचानक मीता का इस तरह से उनकी जिंदगी से हमेशा हमेशा ले लिए चले जाना …. असहनीय था। धीरे धीरे जैसे पता चलता रहा लोग इकठठे होते रहे और उसका अंतिम संस्कार कर दिया..

एक हफ्ता किस तरह बीता उन्हे कुछ याद ही नही। उन का एक ही बेटा था जो कि अमेरिका रहता था। पढाई के बाद वही नौकरी कर ली थी। बेटा आकर जाने की भी तैयारी कर रहा था..

उसने अपने पापा को भी साथ चलने को कहा और वो तैयार भी हो गए। पर मीता की याद को अपने दिल से लगा लिया था। अब उन्हे हर बात मे उसकी अच्छाई ही नजर आने लगी। उन्हे याद आता कि कितना ख्याल रखती थी मीता उनका पर वो कोई भी मौका नही चूकते थे उसे गलत साबित करने का। ना कभी उसकी तारीफ करते और ना कभी उसका मनोबल बढाते बल्कि कर काम मे उसकी गलती निकालने मे उन्हे असीम शांति मिलती थी..

उधर मीता दिनभर काम मे जुटी रहती थी। एक बार् जब काम वाली बाई 2 महीने की छुट्टी पर गई थी तब भी मीता इतने मजे से सारा काम बिना किसी दर्द और शिकन के आराम से गुनगुनाते हुए किया जबकि कोई दूसरी महिला होती तो अशांत हो जाती। दिन रात राजेश बाबू उनकी यादो के सहारे जीने लगे। काश वह तब उसकी कीमत जान पाते। काश वो तब उसकी प्रशंसा कर पाते. काश …. !!!

पर अब बहुत देर हो चुकी थी.. आज राजेश अमेरिका जाने के लिए सामान पैक कर रहे थे। पैक करते करते मीता की फोटो को देख कर अचानक फफक कर रो पडे और बोले मीता, मुझे माफ कर दो। प्लीज वापिस आ जाओ। मै तुम्हारे बिना कुछ नही हूं। आज जान गया हूं कि मै तुमसे कितना कितना प्यार करता हूं….

तभी उन्हें किसी ने पीठ से झकोरा। इससे पहले वो खुद को सम्भाल पाते अचानक उनकी आखं खुल गई। मीता उन्हे घबराई हुई आवाज मे उठा रही थी। वो सब सपना था..

एक बार तो उन्हे विश्वास ही नही हुआ पर दूसरे पल उन्होने मीता का हाथ अपने हाथो मे ले लिया पर आखो से आसूं लगातार बहे जा रहे थे, और मीता नम हुई आखो से अपलक राजेश को ही देखे जा रही थी…
दर्द अपनेपन का, कहानी दर्द अपनेपन का, कहानी Reviewed by Kanchan Ji on February 06, 2022 Rating: 5

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